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बन्धनों की रक्षा! - रक्षाबंधन

 समय के साथ हर त्यौहार की विवेचना बदलती है मध्यकालीन दौर में जब स्त्री को जीतने के लिए बल का प्रयोग किया जाता था तो अपेक्षा थी कि उसे बल के प्रयोग से ही रक्षित किया जायेगा।


समय के साथ हमारे संबंध और दुनिया दोनों बदले हैं।

पितृवंश को अहमियत देने का 'विमर्श' हम सब समझें और मानसिक तौर से अपनी बहनों के साथ खड़े होकर वो सब सहज करें जो एक पुत्र या लडका होने के कारण ही हमें सहजता से मिलता रहा है।

शिक्षा, स्वास्थ्य और निर्णय लिये जाने की स्वतंत्रता का माहौल बनायें घर परिवार में बहनों को लाड दुलार करते करते अपने अंह के तेवर से उसे बांधे न उसे समझें और महसूस करायें कि वो बहन है कोई अंह को तुष्ट करने का संसाधन नहीं।

थोड़ा सा उसके साथ रो लें,हंस ले बोल लें। कभी जो रिश्तेदार बोलने आयें अरे 12वीं पास हो गई ब्याह करा दो तो बहन के साथ खडे़ हों उसे समझें और रिश्तेदार को समझायें की वो अपने घर की चिंता करे। अभी आपकी बहन को आगे और पढना है और वो सब करना है जो वो करना चाहती है।

कभी जो उसे प्रेम विवाह करना हो तो मिलें बैंठे परिवार को जाने समझें और कोशिश करें जानने कि प्रेम विवाह सुकून देगा तो साथ खडे़ हों।

कभी जो बाहर से थककर आयें तो ये अपेक्षा न करें कि बहन ही पानी का ग्लास देगी आप भी उसे पानी का ग्लास दें।

जीवन और जगत नित नवीन परिवर्तन से भरा हुआ है हम सबको इन परिवर्तनों को महसूस करना चाहिए करवाना चाहिए।

रक्षा बंधन की अनंत शुभकामनाएँ उन सभी मां के भाइयों को भी जो शहर और गांव की दूरियों में बंधे हुये अब अपने बच्चों के उत्सव में ही अपना उत्सव ढूंढ लेते हैं।

रक्षा बंधन की अनंत शुभकामनाएँ उन सभी पिताओं को भी जिनके गरीबी का असर रिश्तेदारी में भी झलक जाता है।

त्योहार को उत्सव रहने दें मन का इसे तन का बाजारू लबादा न पहनायें यकीन मानिए मानसिक उपहार किसी के साथ होने का एहसास बहुत बड़ा होता है।
रक्षा बंधन पर हर किसी को हर किसी के साथ होने का एहसास दिलाते रहिये नया भारत बनाते रहिये।

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