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राम - शिवसेना और उत्तर प्रदेश

अयोध्या -हिन्दू गौरव -राम
 “चन्दन है इस देश की माटी तपोभूमि हर ग्राम है, हर बाला देवी की प्रतिमा बच्चा बच्चा राम है”
ये उस भजन या गीत के बोल हैं जो “सेवा भारती” या राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े शैक्षिक संस्थानों में बच्चों से गवाया जाता है, उन्हें गाना सिखाया जाता है| इस गीत में भारत के बच्चे बच्चे को राम कहा जाता है पर क्यों – क्योंकि राम एक मर्यादा है, राम एक आदर्श है, राम राज्य लोकतंत्र का उदारतम रूप है जहाँ नेता (राम) के अतिरिक्त लोगों को शासक का विकल्प ही नहीं चाहिए|
राम एक आदर्श शासक, एक आदर्श पुत्र, आदर्श मित्र, आदर्श भाई, एक सभ्य समाज के आदर्श संस्थापक के एकमात्र प्रतिनिधि केवल और केवल राम|
एक कवि ने लिखा ‘हे राम तुम्हारा चरित्र ही एक काव्य है कोई कवि बन जाए सहज संभाव्य है’
राम भारत के सभ्यता का पर्याय है आदर्श का अंतिम सोपान हैं और हम हिन्दुओं का अभिमान हैं| इसीलिए मंदिर वहीँ बनायेंगे के नारा हम ज़रूर लगायेंगे|
राम अयोध्या के राजा हैं, “अयोध्या” जिसे युद्ध में जीता न जा सके पर क्या सच में अयोध्या को हमने ऐसा बनाया है जिसे जीता न जा सके|  मैंने बहुत जानकारी खोजने का प्रयास किया की मुझे कोई ऐसा तथ्य मिले जो 1992 की दुर्घटना का न हो, जो उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी का न हो, जो अयोध्या में उपलब्ध आधुनिक शिक्षा के सबसे बेहतर परिणाम का हो, जो अयोध्या से लोगों को दिल्ली, मुंबई, बंग्लौर में रोजगार की तलाश में आने से रोकता हो, जो तथ्य अयोध्या को शिक्षा की कमी पर विजेता घोषित करता हो, जो अयोध्या को स्वास्थ्य सुविधाओं में सर्वश्रेष्ठ घोषित करता हो, ऐसे एक तथ्य जो अयोध्या को वर्तमान के बेरोजगारी, गरीबी, भुखमरी, के खिलाफ अयोध्य दर्शाता हो बेहतर जीवन अवस्था को आगे बढाता हो, राम के राज्य में शेर और हिरन को एक घाट पर पानी पिलाता हो , मुझे न अयोध्या दिखी न राम राज्य दिखा|
अब आते हैं आरम्भ पर की बच्चा बच्चा राम है- राम की विधि सम्मत तर्क शीलता शासन के प्रति सजगता का कौन सा तर्क न्यायालय के समक्ष विचाराधीन विषय पर जनता को निर्णय लेने के लिए उकसाता है, राम के चरित्र का कौन सा गुण उद्दंड राजनीति को फूहड़ बयान बाजी को उकसाता है| शिवसेना कहती है राममंदिर कोई भी बनाये हम समर्थन करेंगे यही शिवसेना राम के सबसे निकटवर्ती उत्तर प्रदेश की जनता को और राम के सुसराल कहे जाने वाले बिहार मिथिलांचल के लोगों को मारकर भगाती है, किस प्रकार का समर्थन है ये किस प्रकार की राम भक्ति है ये, राम की उपासना का कौनसा पक्ष है की राम के राज्य से आने वालों को पहले गरियायो फिर कहो राम के लिए हम समर्थन में हैं| शिवसेना को राम से तनिक भी स्नेह है तो सबसे पहले सभी रामनगर वासियों से सार्वजानिक माफ़ी मांगते हुए कहना पड़ेगा की यह सम्पूर्ण देश राम का है कोई भी कहीं भी आ जा सकता है रह सकता है वो उत्तर प्रदेश से हो अथवा बिहार से तब मुझे लगेगा की हाँ आप राम के समर्थन में हैं|
धर्म संसद हो रही है बहुत अच्छी बात है संसद करिये सभा करिये पर पहले राम बनिए राम न सही उसके भक्त बनिए उसके अनुकर्ता बनिए उनके शांत विधि सम्मत स्वरूप को जीना सीखिए| राम अगर संसद में आयें तो उन्हें मेरा प्रणाम कहना हिन्दू गौरव पर बाल्मीकि के राम से या तुलसी के राम से या दुनिया के किसी भी राम से प्रश्न पूछेंगे तो उनका उत्तर यही होगा –
मेरी मर्यादा का पालन करना सीखो, तर्क को तर्क से काटो विधि विधान से रहो आसमान में राम नहीं बसते न ही किसी मंदिर में इन्सान हो इन्सान से रहो| जिस दिन समस्त हिन्दू हिन्दू हो जायेंगे , जिस दिन प्रत्येक हृदय में विधि विधान संविधान के प्रति आस्था और शिक्षा के माध्यम से उसे समझने की समझ विकसित हो जाए, जिस दिन ये पूरा भारत बेरोजगारी, अशिक्षा, भुखमरी पर विजय प्राप्त कर ले समझ लेना राम लला का प्रवेश हो गया, मंदिर वहीँ बन गया| 

टिप्पणियाँ

  1. खूबसूरत लेख भैय्या,काश लोग ये समझ जाए की मजहबी चीजो का सियासी इस्तेमाल ये दोगले नेता कितनी चालाकी से कर रहे हैं।

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